Thursday, 7 March 2013

UPTET : टीईटी के पैसों का नहीं मिल रहा हिसाब

लखनऊ (ब्यूरो)। टीईटी के फार्मों की बिक्री से आए पैसों का हिसाब नहीं मिल पा रहा है। बेसिक शिक्षा विभाग अब वित्त विभाग से इसकी विशेष ऑडिट कराने की तैयारी कर रहा है, ताकि पैसे कहां गए इसका पता लगा दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की जा सके।

नवंबर 2011 में टीईटी आयोजित कराई गई थी। 11,53,155 अभ्यर्थियों ने फार्म भरे। जानकारों की मानें तो टीईटी फार्म भरने से माध्यमिक शिक्षा विभाग को 64 करोड़ रुपये मिले। परीक्षा कराने के लिए प्रत्येक मंडलों को 30 से 32 लाख रुपये दिए गए। रिजल्ट तैयार करने वाली कंप्यूटर कंपनी को 5 करोड़ रुपये के आसपास दिए गए। बाकी पैसे कहां खर्च किए गए पता नहीं चल पा रहा है और न ही माध्यमिक शिक्षा परिषद इसका हिसाब बेसिक शिक्षा विभाग को दे पा रहा है।

प्रमुख सचिव बेसिक शिक्षा सुनील कुमार इस संबंध में बेसिक शिक्षा परिषद के निदेशक को कई बार पत्र लिख चुके हैं। सूत्रों के अनुसार बेसिक शिक्षा विभाग ने तय किया है कि टीईटी के पैसों की विशेष ऑडिट करा ली जाए, ताकि पैसे के बारे में जानकारी मिल सके। यह भी बताया जा रहा है कि हिसाब न मिलने पर तत्कालीन माध्यमिक शिक्षा परिषद की सचिव प्रभा त्रिपाठी के खिलाफ कार्रवाई भी की जा सकती है  

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